आईने के उस पार (Beyond the Mirror)

कहानी: आर्यन ने शहर के एक पुराने एंटीक स्टोर से एक बड़ा सा आदमकद आईना खरीदा। दुकानदार ने उसे बेचते वक्त अजीब सी नजरों से देखा और कहा, “साहब, इसे कभी अंधेरे में मत देखिएगा।” आर्यन ने इसे बस एक अंधविश्वास माना।

उस रात, आर्यन अपने बेडरूम में सो रहा था कि उसे कुछ गिरने की आवाज आई। उसने देखा कि आईना अपनी जगह से थोड़ा खिसक गया है। उसने उसे सीधा किया और वापस बिस्तर पर लेटा। तभी उसकी नजर आईने पर पड़ी। आईने में उसका ही प्रतिबिंब (Reflection) दिख रहा था, जो बिस्तर पर लेटा था।

लेकिन कुछ सेकंड बाद, आर्यन की रीढ़ में सिहरन दौड़ गई। आर्यन ने करवट बदली, लेकिन आईने में उसके प्रतिबिंब ने करवट नहीं ली। वह अभी भी सीधा लेटा हुआ उसे ही घूर रहा था। आर्यन का गला सूख गया। उसने अपना हाथ हिलाया, प्रतिबिंब स्थिर रहा।

अचानक, आईने के अंदर वाले आर्यन ने धीरे से होंठ हिलाए और एक डरावनी मुस्कान के साथ कहा—”अब मेरी बारी है।” इससे पहले कि आर्यन कुछ समझ पाता, एक अदृश्य ताकत ने उसे बिस्तर से खींचा और आईने की तरफ फेंक दिया। आर्यन आईने से टकराया नहीं, बल्कि उसके अंदर गिर गया।

जब उसकी आँख खुली, तो उसने देखा कि वह कांच के पीछे कैद है। और उसके कमरे में, उसका शरीर मजे से सीटी बजाते हुए बाहर जा रहा था। आर्यन अब सिर्फ एक प्रतिबिंब था।

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