शहर के एक मशहूर 5-स्टार होटल में ‘बिज़नेसमैन ऑफ़ द ईयर’ का अवार्ड लेने के लिए जब 45 साल के राघव स्टेज पर चढ़े, तो पूरा हॉल तालियों से गूंज रहा था। सूट-बूट में सजे राघव के चेहरे पर एक शांत मुस्कान थी। लेकिन दुनिया यह नहीं जानती थी कि इस सूट के पीछे एक ऐसा आदमी खड़ा है जिसे कभी उसके अपने शहर में “मिस्टर लूज़र” (हारने वाला) कहा जाता था।
राघव की कहानी शुरू हुई थी 20 साल पहले। उसने कॉलेज छोड़कर अपना पहला बिज़नेस शुरू किया—एक किताबें बेचने की दुकान। 6 महीने में दुकान बंद हो गई। उसने फिर कोशिश की, इस बार कपड़ों का व्यापर। वह भी ठप हो गया। फिर उसने मोबाइल रिपेयरिंग, टिफिन सर्विस, यहाँ तक कि अगरबत्ती बेचने का काम भी किया।
एक के बाद एक… राघव कुल 99 बार फेल हुआ।
उसके दोस्त उसकी पीठ पीछे मज़ाक उड़ाते, “अरे देखो, वो आ रहा है बिज़नेस टाइकून! आज कौन सी कंपनी डुबोने वाला है?” उसके रिश्तेदार उसे ताने मारते कि वह परिवार पर बोझ है। हालत यह हो गई कि राघव के पास जेब में फूटी कौड़ी नहीं बची थी। उसका आत्मविश्वास चकनाचूर हो चुका था।
टूटा हुआ हौसला 99वें बिज़नेस (एक ऑनलाइन ऐप) के फेल होने के बाद राघव पूरी तरह टूट गया। वह अपने घर की छत पर बैठा रो रहा था। उसने अपनी डायरी निकाली जिसमें वह अपने हर आईडिया को लिखता था। उसने सोचा, “शायद मैं बदनसीब हूँ। मुझे अब नौकरी कर लेनी चाहिए।” उसने डायरी को कूड़ेदान में फेंकने के लिए उठाया।
तभी उसकी नज़र अपनी पत्नी पर पड़ी जो रद्दी अख़बारों से लिफाफे बना रही थी ताकि घर का खर्च चल सके। राघव का दिल पसीज गया। उसने सोचा, “सिर्फ एक बार और। यह मेरी 100वीं कोशिश होगी। अगर इस बार भी हारा, तो मैं हमेशा के लिए हार मान लूँ।”
100वीं कोशिश राघव ने देखा कि उसके शहर में किसान बहुत सारा टमाटर और फल सड़कों पर फेंक देते हैं क्योंकि उन्हें सही दाम नहीं मिलता। राघव के दिमाग की बत्ती जली। उसने अपनी पत्नी के साथ मिलकर घर की रसोई में ही उन फेंके हुए फलों से ‘ऑर्गेनिक जैम’ और ‘सॉस’ बनाना शुरू किया।
पैसे नहीं थे, इसलिए उसने पुराने कांच के जार धोकर इस्तेमाल किये। वह साइकिल पर जाकर घर-घर जैम बेचने लगा। लोगों ने पहले मना किया, लेकिन जिसने भी चखा, वह दीवाना हो गया। स्वाद में जादू था!
राघव ने अपनी पिछली 99 गलतियों से सीखा था। उसे पता था कि मार्केटिंग कैसे नहीं करनी है, पैसे कहाँ नहीं फंसाने हैं। इस बार उसका अनुभव उसका सबसे बड़ा हथियार था। धीरे-धीरे आर्डर बढ़ने लगे। साइकिल से स्कूटर, स्कूटर से वैन, और वैन से एक बड़ी फैक्ट्री।
उसकी कंपनी “राघव फ्रेश” देखते ही देखते देश का नंबर 1 ब्रांड बन गई। जो लोग उसे “मिस्टर लूज़र” कहते थे, आज वही लोग उसकी फैक्ट्री में नौकरी मांगने आते थे।
जीत का रहस्य स्टेज पर अवार्ड हाथ में लेते हुए एंकर ने राघव से पूछा, “सर, 99 बार फेल होने के बाद भी आप रुके क्यों नहीं? आपकी सफलता का राज क्या है?”
राघव ने माइक थामते हुए मुस्कुराकर कहा: “मैं 99 बार फेल नहीं हुआ। मैंने बस 99 ऐसे तरीके ढूंढे जिनसे सफलता नहीं मिलती। और जब वो सारे गलत तरीके खत्म हो गए, तो 100वां तरीका सही होना ही था। अगर मैं 99वें पर रुक जाता, तो आज यहाँ खड़ा नहीं होता।”
हॉल में सन्नाटा छा गया और फिर सबकी आँखों में सम्मान के आँसू थे। राघव ने साबित कर दिया था कि हार तब नहीं होती जब आप गिरते हैं, हार तब होती है जब आप उठने से मना कर देते हैं।
💡 कहानी की सीख (Moral)
“असफलता अंत नहीं, बल्कि सफलता की सीढ़ी का एक पायदान है। हर हार आपको सिखाती है कि अगली बार क्या नहीं करना है। जीतने वाला वो नहीं जो कभी फेल नहीं हुआ, बल्कि वो है जिसने हारना नहीं छोड़ा।”



