सरहदों से परे

कहानी: आर्यन एक फौजी था और मीरा एक स्कूल टीचर। उनकी मुलाकात एक शादी में हुई थी और कुछ ही दिनों में उन्हें एक-दूसरे से प्यार हो गया। लेकिन फौजी की जिंदगी आसान नहीं होती। शादी के महज 10 दिन बाद आर्यन को बॉर्डर पर बुला लिया गया।

मीरा ने उसे हँसते हुए विदा किया, लेकिन अंदर से वह डरी हुई थी। वे खतों के जरिए जुड़े रहे। आर्यन अपने हर खत में लिखता, “मैं वापस आऊँगा, और हम अपना घर बनाएँगे।” एक दिन खबर आई कि आर्यन की पोस्ट पर हमला हुआ है और कई जवान लापता हैं। मीरा की दुनिया उजड़ गई, लेकिन उसकी उम्मीद नहीं टूटी। गांव वाले उसे पागल कहने लगे, क्योंकि वह रोज डाकिया का इंतजार करती।

पूरे 6 महीने बाद, एक दिन दरवाजे पर दस्तक हुई। मीरा ने दरवाजा खोला तो सामने आर्यन खड़ा था—घायल, कमजोर, लेकिन जिंदा। उसने मीरा को देखते ही कहा, “मैंने वादा किया था न, कि हम अपना घर बनाएँगे।” मीरा की आँखों से आँसू बह निकले। प्यार ने मौत को भी हरा दिया था। उस दिन पूरे गाँव ने देखा कि सच्चे प्यार की ताकत किसी भी जंग से बड़ी होती है।

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