खामोश धड़कन

कहानी: कबीर एक गूंगा (mute) लड़का था, जो अपनी बातें इशारों से या लिखकर समझाता था। उसे अपनी ही क्लास की नैना से प्यार था, जो कॉलेज की सबसे चुलबुली लड़की थी। कबीर को लगता था कि नैना उसे कभी स्वीकार नहीं करेगी, इसलिए उसने अपने जज्बात हमेशा डायरी तक सीमित रखे।

कॉलेज का आखिरी दिन था। फेयरवेल पार्टी चल रही थी। कबीर अपनी डायरी लाइब्रेरी में भूल गया। किस्मत से वह डायरी नैना के हाथ लग गई। उसने पन्ने पलटे और हैरान रह गई। हर पन्ने पर नैना की बातें, उसकी मुस्कान और उसकी छोटी-छोटी आदतों का जिक्र था। आखिरी पन्ने पर लिखा था, “मैं शायद कभी बोल न पाऊं कि तुमसे प्यार करता हूँ, लेकिन मेरी खामोशी में सिर्फ़ तुम्हारा नाम गूँजता है।”

नैना दौड़कर कबीर के पास गई, जो कॉलेज गेट से बाहर जा रहा था। उसने कबीर का हाथ पकड़ा और बिना कुछ बोले अपनी आँखों से इकरार किया। नैना ने कबीर की भाषा सीखी और कबीर ने नैना की दुनिया को अपनी खामोशी से मुकम्मल कर दिया। दुनिया के लिए वे शांत थे, लेकिन उनके दिलों का शोर सिर्फ़ वे ही सुन सकते थे।

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