कहानी: विकास एक ट्रेवल व्लॉगर था, जो डरावनी जगहों पर वीडियो बनाता था। उसने शिमला के एक बदनाम होटल के रूम नंबर 303 में रुकने का फैसला किया, जहाँ कहा जाता था कि जो भी वहां रुकता है, सुबह तक जिंदा नहीं बचता।
होटल के मैनेजर ने उसे बहुत समझाया, लेकिन विकास ने कैमरा ऑन किया और कमरे में चला गया। कमरा बिल्कुल सामान्य था। रात के 12 बजे तक सब ठीक रहा। 12:05 पर, विकास ने वीडियो रिकॉर्ड करते हुए कहा, “देखो दोस्तों, यहाँ कुछ नहीं है, सब अफवाहें हैं।”
तभी, बाथरूम का नल अपने आप चल पड़ा। विकास कैमरा लेकर वहां गया और नल बंद किया। जैसे ही वह मुड़ा, उसने देखा कि कमरे के बीचों-बीच रखी कुर्सी पर कोई बैठा है। लेकिन कुर्सी खाली थी। वह कुर्सी का गद्दा ऐसे दब रहा था जैसे कोई भारी इंसान उस पर बैठा हो।
अचानक, विकास का कैमरा ज़मीन पर गिर गया। रिकॉर्डिंग में सिर्फ विकास की चीखें और भारी कदमों की आवाज़ कैद हुई। अगली सुबह, कमरा अंदर से लॉक था। पुलिस ने दरवाजा तोड़ा। कमरा खाली था। खिड़कियाँ सील थीं। विकास गायब था। कैमरे की फुटेज चेक की गई। वीडियो के आखिरी हिस्से में, विकास किसी अदृश्य ताकत से हवा में उठाया गया और उसे दीवार के अंदर घसीट लिया गया। उस दीवार पर आज भी एक अजीब सा उभार है, जो हूबहू इंसान के आकार का है।
