खूनी हवेली: एक अनसुलझा रहस्य

रामपुर गाँव के बाहरी इलाके में एक पुरानी हवेली थी, जिसे लोग ‘शापित हवेली’ कहते थे। यह हवेली करीब 200 साल पुरानी थी और अमावस की रात वहाँ से रोने की आवाज़ें आती थीं। शहर से चार दोस्त—समीर, रोहन, प्रिया और अंजलि—एडवेंचर के लिए उस गाँव में आए। उन्होंने गाँव वालों की चेतावनी को नज़रअंदाज़ कर दिया कि “सूरज ढलने के बाद हवेली का दरवाजा जो भी खोलता है, वो कभी वापस नहीं आता।”

रात के 12 बज रहे थे। चारों दोस्त टॉर्च लेकर हवेली के अंदर घुसे। अंदर धूल की मोटी परत और जाले थे। जैसे ही वे मुख्य हॉल में पहुँचे, अचानक हवेली का भारी दरवाजा अपने आप ज़ोर से बंद हो गया। सन्नाटा इतना था कि उनकी अपनी साँसें भी शोर मचा रही थीं। अचानक, ऊपर की मंज़िल से पायल की छन-छन की आवाज़ आने लगी।

समीर ने हिम्मत दिखाई और ऊपर जाने का फैसला किया। जैसे ही वह सीढ़ियों पर चढ़ा, उसे लगा कि कोई उसके पीछे चल रहा है। उसने मुड़कर देखा, तो कोई नहीं था। लेकिन जैसे ही वह वापस मुड़ा, उसके सामने एक सफ़ेद साड़ी में लिपटी महिला खड़ी थी, जिसका चेहरा बालों से ढका था। उससे पहले कि समीर चीख पाता, उस साये ने उसे हवा में उठा दिया। नीचे खड़े दोस्तों ने सिर्फ समीर की एक दर्दनाक चीख सुनी और फिर सब शांत हो गया।

प्रिया और अंजलि डर के मारे रोने लगे, लेकिन रोहन ने भागने की कोशिश की। पर हवेली का कोई भी दरवाजा नहीं खुला। तभी दीवार पर खून से लिखा हुआ दिखाई दिया— “अब तुम्हारी बारी है।” सुबह जब गाँव वाले वहाँ पहुँचे, तो हवेली का दरवाजा खुला था, लेकिन अंदर कोई नहीं था। पुलिस को वहाँ सिर्फ चार मोबाइल फोन मिले, जिनमें आखिरी वीडियो रिकॉर्डिंग में सिवाय अंधेरे और चीखों के कुछ नहीं था। आज भी लोग कहते हैं कि अमावस की रात वहाँ अब एक नहीं, बल्कि पाँच लोगों के रोने की आवाज़ें आती हैं।

0

Subtotal