रात के 3 बजे: ऑफिस की लिफ्ट

आर्यन एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर था। एक बड़े प्रोजेक्ट की डेडलाइन के कारण वह ऑफिस में अकेला रुक गया था। रात के 3 बज रहे थे। पूरी बिल्डिंग खाली थी, सिवाय सिक्योरिटी गार्ड के जो ग्राउंड फ्लोर पर था। आर्यन 15वीं मंज़िल पर था। काम ख़त्म करके उसने लिफ्ट का बटन दबाया।

लिफ्ट का दरवाजा खुला, अंदर कोई नहीं था। आर्यन अंदर गया और ‘Ground Floor’ का बटन दबाया। लिफ्ट नीचे जाने लगी। लेकिन अचानक लिफ्ट 7वीं मंज़िल पर रुक गई। 7वीं मंज़िल पर कंस्ट्रक्शन का काम चल रहा था और वहाँ अँधेरा था। लिफ्ट का दरवाजा खुला, लेकिन बाहर कोई नहीं था। आर्यन ने झुककर देखा, सन्नाटा था। उसने जल्दी से ‘Close’ बटन दबाया।

दरवाजा बंद होने ही वाला था कि उसे लगा कि अँधेरे से कोई लिफ्ट की तरफ दौड़ता हुआ आ रहा है। दरवाजा ऐन मौके पर बंद हो गया। आर्यन की धड़कनें तेज़ थीं। लिफ्ट नीचे जाने लगी, लेकिन तभी आर्यन को महसूस हुआ कि उसके कंधे पर किसी ने हाथ रखा है। लिफ्ट में चारों तरफ आईने लगे थे। उसने सामने वाले आईने में देखा—उसके पीछे एक काला साया खड़ा था, जिसकी आँखें लाल अंगारों जैसी थीं।

आर्यन चिल्लाया, लेकिन लिफ्ट की लाइटें फड़फड़ाने लगीं। लिफ्ट तेज़ी से नीचे गिरने लगी और धड़ाम से ग्राउंड फ्लोर पर रुकी। गार्ड ने आवाज़ सुनकर लिफ्ट खोली। अंदर आर्यन बेहोश पड़ा था और लिफ्ट की दीवारों पर नाखूनों से खरोंच के ताज़ा निशान थे। होश में आने के बाद आर्यन ने कभी नाइट शिफ्ट नहीं की, लेकिन कहते हैं कि आज भी उस ऑफिस की लिफ्ट रात को अपने आप 7वीं मंज़िल पर रुकती है।

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